- पढ़ें लोहारी राघो में ‘रावण’ के रुप में पहचान बना चुके सबसे दमदार कलाकार की कहानी
- महज 15 की उम्र में रामलीला में इंद्र व मेघनाथ के अभिनय से की थी शुरुआत
- लगातार कई साल तक आदर्श रामा क्लब के रहे डायरेक्टर
संदीप कम्बोज
लोहारी राघो। बात जब लोहारी राघो रामलीला की हो और राजकुमार भट्टी का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। इस कलाकार के अभिनय का अंदाजा तो आप इसी से लगा सकते हैं कि इनके स्टेज पर आते ही लोग चाय की चुस्कियां व जलते बीड़ी-सिगरेट के गश छोड़कर पंडाल की ओर दौड़ पड़ते थे और हर डायलॉग पर पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता था। इनकी बुलंद आवाज ही इनकी सबसे बड़ी पहचान है। इस कलाकार की आवाज इतनी बुलंद थी कि बच्चे सहम जाते थे। जी हाँ ! हम बात कर रहे हैं 90 के दशक में लोहारी राघो रामलीला में रावण के किरदार से अपने अभिनय की धूम मचाने वाले प्रख्यात कलाकार राजकुमार भट्टी की। लोहारी राघो की पुरानी रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले हंसराज चांदना को अपना आदर्श मानने वाले राजकुमार भट्टी ने रावण का इतना दमदार किरदार निभाया था कि उनके आगे बाकी सारे कलाकार आज भी फीके नजर आते हैं। वो कड़क आवाज और वो अकड़कर चलने का अंदाज आज भी लोगों को खूब पसंद है। हालांकि रावण का किरदार निभाने वाले ये शख्स निजी जिंदगी में बहुत सीधे-साधे व्यक्ती हैं। गाँव लोहारी राघो में आदर्श रामा क्लब का गठन कर इन्होंने न केवल सभी जाति/समुदायों के कलाकारों को एक मंच पर अभिनय करने का अवसर दिया बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में भी भरपूर योगदान दिया। इस प्रख्यात कलाकार को लोहारी राघो रामलीला का सबसे दमदार कलाकार भी कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। पढ़ें लोहारी राघो में ‘रावण’ के रुप में पहचान बना चुके 52 वर्षीय राजकुमार भट्टी की पूरी कहानी। बता रहे हैं संदीप कम्बोज।
आज भी कंठस्थ हैं सभी डायलोग, खुद ही लिखी पूरी रामलीला
10
जनवरी 1969 को जिला हिसार के तहसील नारनौंद अंतर्गत गाँव लोहारी राघो में
गुगन राम भट्टी के घर जन्मे राजकुमार भट्टी को बचपन से ही सांस्कृतिक
गतिविधियों मेें भाग लेना पसंद था लेकिन इन्हें असली पहचान रावण के किरदार
से ही मिली। रामलीला के दर्शकों के बीच वे काफी लोकप्रिय भी रहे। राजकुमार
भट्टी की सबसे खास बात यह कि इन्हें न केवल अपने किरदार के सभी डायलोग पूरी
तरह से कंठस्थ हैं बल्कि पूरी की पूरी रामलीला के डायलोग को भी इन्होंने
खुद लिखा है। अभिनय करते समय इन्हें कभी भी परामट की जरुरत नहीं पड़ी। वे
बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही रामलीला देखने का शौंक था। रामलीला में
रावण का किरदार निभाने वाले हंसराज चांदना से वे इतने ज्यादा
प्रभावित हुए कि घर में ही रावण के डायलोग का अभ्यास करने लगे। इन्होंने
हंसराज चांदना को अपना आदर्श मानकर अभिनय की शुरुआत की और अन्य कलाकारों पर
भारी पड़े।
रामलीला मंच पर 15 की उम्र में पहली बार किया अभिनय
राजकुमार
भट्टी वर्ष 1982 में जब 13 साल के थे तो पहली बार जिला स्तरिय भाषण
प्रतियोगिता में भाग लिया जिसका विषय था ‘बढ़ती जनसंख्या वरदान या अभिशाप’।
यह पहला मौका थाजब वे किसी मंच पर प्रस्तुति दे रहे थे। प्रतियोगता में
तृतिय स्थान पर रहे। यहाँ इनकी बुलंद प्रस्तुति से पंडाल से उठी तालियोंं
की गड़गड़ाहट ने इनके अंदर एक नई उर्जा का संचार कर दिया। रामलीला में अभिनय
करने की कसक मन में लिए राजकुमार भट्टी ने जोर-शोर से घर पर ही अभ्यास
शुरु कर दिया। वर्ष 1984 में श्री रामा क्लब द्वारा आयोजित रामलीला में
पहली बार मेघनाथ व इंद्र का अभिनय कर अभिनय की शुरुआत की। इसके अलावा वर्ष
1989 व 90 की रामलीला के दौरान इन्हों ने बाली व सुग्रीव के किरदार अदा कर
भी खूब वाहवाही बटोरी।
1991 में आदर्श रामा क्लब का गठन, लोहारी में दूसरी रामलीला की शुरुआत
महज
4-5 साल के अभिनय से ही लोहारी राघो के महान कलाकार राजकुमार भट्टी के
दर्शक इस कदर दीवाने हो चुके थे कि वे अब इन्हें रावण के किरदार में देखना
चाहते थे। रामलीला के दौरान कई बार दर्शकों ने पर्ची भेजकर क्लब प्रबंधकों
को इस बाबत निवेदन भी किया था लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
राजकुमार भट्टी भी क्लब में कुछ गतिविधियों को लेकर असंतुष्ष्ट चल रहे थे।
जब क्लब प्रबंधकों द्वारा कोई हल नहीं निकाला गया तो उन्होंने नए रामा क्लब
के गठन को हरी झंडी दे डाली। श्री रामा क्लब से निष्कासित कलाकारों को साथ
लेकर वर्ष 1991 में इन्होंने आदर्श रामा क्लब का गठन किया जिसके डायरेक्टर
स्वंय राजकुमार भट्टी व डिप्टी डायरेक्टर जयचंद कम्बोज को बनाया गया। इस
क्लब की सबसे खास बात यह रही कि आरंभ से लेकर इसके डायरेक्टर, डिप्टी
डायरेक्टर व अन्य क्लब प्रबंधन में कोई बदलाव नहीं किया गया। वर्ष 1991 में
आदर्श रामा क्लब के गठन के साथ ही गाँव में दूसरी रामलीला की शुरुआत हो
गई। रामलीला के लिए कुछ सामान हांसी स्थित जयभारत मंडल द्वारा उपलब्ध
करवाया गया था जबकि कुछ सामान वे स्वंय खरीदकर लाए थे। इस पंचायती रामलीला
की सबसे बड़ी खासियत की व पहली बार गाँव की सभी जाति/वर्गों के कलाकारों को
अभिनय का अवसर मिला।
सीता हरण के गिलास तोड़ने वाले सीन ने दिलाई विशेष पहचान
लोहारी
राघो के ‘रावण’ के रुप में पहचान बना चुके राजकुमार भट्टी को सबसे ज्यादा
पहचान सीता हरण के गिलास तोड़ने वाले सीन ने दिलाई। इस सीन को देखने के लिए
दर्शक न केवल उत्सुक रहते थे बल्कि आपस में शर्त तक लगा लेते थे। 90 के
दशके में जब गाँव में दो रामलीलाओं का आयोजन हो रहा था तो जबरदस्त कंपीटिशन
देखने को मिलता था। श्री रामा क्लब की रामलीला में वर्तमान में हांसी
विधायक विनोद भ्याना (तत्कालीन सरपंच लोहारी राघो) रावण का किरदार अदा
करते थे तो आदर्श रामा क्लब की रामलीला में राजकुमार भट्टी।
अब भी कर रहे रामलीला क्लब की मदद
राजकुमार
भट्टी वर्तमान में हिसार स्थित पाटेल नगर में रह रहे हैं तथा अब भी गाँव
लोहारी राघो में रामलीला प्रबंधन समिति की मदद करते रहते हैं। वे बताते
हैं कि जब वर्ष 20001 में गाँव में रामलीला मंचन बंद हो गया था तो उन्होंने
गाँव के बच्चों को रामलीला करने के लिए क्लब का सारा सामान उपलब्ध करवा
दिया था। लगातार कई साल तक अलग-अलग स्थानों पर रामलीला मंचन होता रहा और वे
स्वंय भी कभी-कभी रामलीला में जाकर योगदान करते रहे हैं। अब वर्तमान में
आदर्श रामा क्लब का सारा सामान श्री रामा क्लब को मुहैया करवाया गया है
ताकि गाँव की यह सांस्कृतिक विरासत जीवित और अमर रहे और गाँव की पहचान बनी
रहे।
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